जीवन रक्षक : श्री श्री ठाकुर अनुकुलचंद्र
आत्मचेतना जगी नहीं तो जीवन तेरा शव समान
गुरु कृपा ही केवलम - १
बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि
महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर
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